आज मैं यह सोचता हूँ की वह कौन से teacher हैं जिन्होंने मेरे स्कूल लाइफ को बेहतरीन बनाया तो मुझे ख्याल आचार्य मैडम का आता है ..... वो बहुत ही मिलन सार और बहुत ही प्यारी थी मुझे बहुत मानती थी.....वह हमें हिस्ट्री पढाती थीं। और शायद में जो कुछ भी सोशल साइंस में जानता समझता हूँ वह भी उन्ही दिनों की बदौलत है, जब उन्होंने मेरे बालमन में जिज्ञासा के बीज बोए थे। उनकी एक बात मुझे अक्सर याद आती है जब में स्कूल में होने वाले सारे प्रतियोगिताओं में असफल हो रहा था और थोड़ा मायूस और उदास रहता था ...तो मैडम ने समझाया था की सब दिन एक जैसे नहीं होते रात के बाद दिन ज़रूर होता है इस लिए निराश होने की कोई ज़रूरत नहीं है और अपने काम में लगे रहो......
अपनी शादी के बाद वह हमसे मिलने भी आई थी और इतने सालों बाद मुझे पहचना और अपने माथे से मेरे माथा लगाकर मुझे आशीर्वाद भी दिया..........
में आचार्य मैडम को सदा याद रखूंगा । अगर कहीं से उनसे सम्पर्क हो जाए तो मुझे बहुत खुशी होगी ।
Monday, October 5, 2009
Saturday, May 2, 2009
क्या सच में ऐसा होता है?
अपने कई दोस्तों से मैंने यह कहते सुना है की वहां अच्छी पढ़ाई होती है , वहां के टीचर्स अच्छे हैं। लेकिन मुझे लगता है उच्च शिक्षा में इन सब की उतनी ज़्यादा ज़रूरत नहीं है जितनी की self study की । क्यूंकि कोई भी पढ़ने वाला कोई जादू तो नहीं कर सकता जब तक पढने वाला नहीं चाहे ...................
Friday, April 24, 2009
अपनी बात
अपनी बातों को नेट पर देख कर बहुत अच्छा लगता है। दिल कर रहा है की रुकू ही नहीं बस लिखते जाऊं। अब सवाल है की क्या लिखूं तो उसका सिर्फ़ एक ही जवाब है जो मान में आए लिखो बस..........मत सोचो की क्या लिखना है और क्या नहीं
कई दिनों बाद
आज कई दिनों बाद अपने ब्लॉग पर आ रहा हूँ मैं तो अपने इस ब्लॉग को भूल ही गया था लेकिन शुक्र है इस ने मुझे नहीं भूला। कई दिनों से मैं अपने अन्दर एक कमी महसूस कर रहा था लेकिन समझ में नहीं आ रहा था आख़िर इस की वजह क्या है ..........इस वजह सिर्फ़ यह है की मैं अपने मान की भड़ास को नहीं निकल पा रहा था.....मैं अपने इस ब्लॉग में सारी बातें सच सच कहना चाहता हूँ कोई भी बाह ग़लत और झूठी नहीं बोलूँगा। लोग बोलेगे की की कैसी मन की भड़ास है मेरे अन्दर .....मेरे अन्दर अपने काम को इमानदारी से नहीं करने की भड़ास है .मेरे कम हिया पढ़ाई करना और वोह काम में सही से नहीं कर रहा हूँ इस लिए दिल में एक अपराध बोध रहता है ..............अभी मेरे इम्तिहान चल रहे हैं दो पेपर ख़राब हो गए हैं , तीसरा सिर्फ़ ठीक ठाक ही गया है ....और चौथा अभी शरू होने वाला हैं में कुछ नहीं कर रहा हूँ बहुत ही अपराधी सा महसूस करता हूँ ...................
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