Friday, April 24, 2009
अपनी बात
अपनी बातों को नेट पर देख कर बहुत अच्छा लगता है। दिल कर रहा है की रुकू ही नहीं बस लिखते जाऊं। अब सवाल है की क्या लिखूं तो उसका सिर्फ़ एक ही जवाब है जो मान में आए लिखो बस..........मत सोचो की क्या लिखना है और क्या नहीं
कई दिनों बाद
आज कई दिनों बाद अपने ब्लॉग पर आ रहा हूँ मैं तो अपने इस ब्लॉग को भूल ही गया था लेकिन शुक्र है इस ने मुझे नहीं भूला। कई दिनों से मैं अपने अन्दर एक कमी महसूस कर रहा था लेकिन समझ में नहीं आ रहा था आख़िर इस की वजह क्या है ..........इस वजह सिर्फ़ यह है की मैं अपने मान की भड़ास को नहीं निकल पा रहा था.....मैं अपने इस ब्लॉग में सारी बातें सच सच कहना चाहता हूँ कोई भी बाह ग़लत और झूठी नहीं बोलूँगा। लोग बोलेगे की की कैसी मन की भड़ास है मेरे अन्दर .....मेरे अन्दर अपने काम को इमानदारी से नहीं करने की भड़ास है .मेरे कम हिया पढ़ाई करना और वोह काम में सही से नहीं कर रहा हूँ इस लिए दिल में एक अपराध बोध रहता है ..............अभी मेरे इम्तिहान चल रहे हैं दो पेपर ख़राब हो गए हैं , तीसरा सिर्फ़ ठीक ठाक ही गया है ....और चौथा अभी शरू होने वाला हैं में कुछ नहीं कर रहा हूँ बहुत ही अपराधी सा महसूस करता हूँ ...................
Subscribe to:
Comments (Atom)
